Wednesday, 2 November 2016

Ghazal

बेक़रारी  सी बेक़रारी है
इक तेरे इश्क़ की खुमारी है
हमने हर लमहा दूरी में
हर घड़ी तेरे साथ ही गुजारी है
ना गई तेरी बेरूखी की लज़्ज़तें
हर एक बात हमने दिल में उतारी है
तू न था तुझको कहीं तो देखा था
लिया न नाम तेरा बेआवाज़ याद पुकारी है
हज़ारों में कहीं नाम तो रहा होगा
कई इश्क़ में इक हमारी भी शुमारी है
बच्चियां सब इस अह्द की चिड़ियाँ हुई
आदमी का न पता भेड़िया है या शिकारी है
हमारी चाहत का कश्कोल* रहा सदा खाली
सारी ज़ीसत* रहा ये दिल भिखारी है


بیقراری سی  بیقراری  ہے
ایک  تیرے  عشق  کی  خماری  ہے
ہمنے  ہر  لمحہ  دوری  مے
ہر گھڑی   تیرے  ساتھ  ہی  گزاری  ہے
نا گی تیری بے رخی کی لذّتیں
ہر  ایک  بات  ہمنے  دل  مے  اتا  ری  ہے
تو  نا  تھا  تجھکو  کہیں  تو  دیکھا  تھا
لیا  نا  نام  تیرا بے -آواز  یاد  پکاری  ہے
ہزارو  مے  کہیں  نام  تو  رہا  ہوگا
کیی عشق مے  ایک  ہماری  بھی  شماری  ہے
بچچیاں  سب  اس  احد  کی  چڑیا   ہویی 
آدمی  کا  نا  پتا  بھیدیا  ہے  یا  شکاری  ہے
ہماری  چاہت  کا  کشکول * رہا  سادہ  خالی
ساری  زیست  رہا  یہ  دل  بھکاری  ہے


Beqarari si beqarari hai
Ek tere ishq ki khumari hai
Humne har lamha doori me
Har ghadi tere sath hi guzari hai
Na gayi teri berukhi ki lazzaten
Har ek baat humne dil me utari hai
Tu na tha tujhko kahin to dekha tha
Liya na naam tera be-awaz yaad pukari hai
Hazaro me kahin naam to raha hoga
Kayi ishq me ek hamari bhi shumari hai
Bachchiyan sab is ehad ki chidiya hui
Admi ka na pata bhediya hai ya shikari hai
Hamari chahat ka kashkol* raha sada khali
Saari zeest raha yeh dil bhikari hai



*katora
*zindagi


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